फ्रेंडशिप डे पर दोस्ती, वैलंटाइंस डे पर शादी


अंशू तालूजा और अभिनव महेश्वरी के लिए वैलन्टाइन डे जिंदगीभर के लिए यादगार बन गया। प्राइमरी स्कूल में साथ पढ़े थे। तब , न दोस्ती की समझ थी और न प्रेम के समंदर में गोते लगाने का कोई सपना ही था। अभिनव के अक्सर कमेंट मारने की हरकतों से अंशू चिढ़ने जरूर लगी। छठवीं में साथ छूटा और फिर मिले इंटर में। फ्रेंडशिप डे पर गले - शिकवे दूर करके दोस्त बने और वैलन्टाइंस डे पर प्यार कर बैठे। बरसों तक एक दूसरे के वैलन्टाइन रहे। बिरादरी के बंधन टूटे और प्रेम के इजहार वाले वैलन्टाइंस डे को ही दोनों एक दूजे के हो गए। बच्चों को खुशी देकर घरवाले भी ' हैपी वैलन्टाइंस ' बोल उठे।

अलीगढ़ की बैंक कॉलनी के अभिनव महेश्वरी उर्फ सोनू अपनी ही सब - मर्सिबल बनाने वाली फैक्ट्री के मैनेजर हैं। उनकी वैलन्टाइन अंशू तालूजा लेबर - लॉ की जानकार हैं। वे आठ साल तक प्रेमी रहे। वैलन्टाइंस डे पर अपने ही वैलन्टाइन को पाकर उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। शाम के आयोजन को भव्य व यादगार बनाने के लिए अभिनव ने कोई कसर नहीं छोड़ी। ' मैनजर ' के बतौर बेहतर आयोजन के लिए तमाम चीजें बारीकी से पूछ डालीं। कभी टेंट वाले को बुलाकर सुझाव देते , कभी किसी और को। दोस्तों से घिरे अभिनव ने यादगार क्षणों के बीच तनिक आग्रह पर अपनी प्रेम कहानी के अंजाम तक पहुंचने की कहानी सुनाने को राजी हो गए।

यह कहानी बचपन से ही शुरू हुई। श्याम नगर की अंशू और बैंक कालोनी के अभिनव की स्कूली पढ़ाई जाकिर हुसैन पब्लिक स्कूल में हुई। दोनों यहीं पहली बार मिले और जल्दी ही दोस्त बन गए। अभिनव बताते हैं कि बचपन में कॉमेंट मारने में बड़ा मजा आता था। अंशू पास में बैठती थी और अक्सर ये कॉमेंट उसी पर होते थे। अंशू इससे बहुत चिढ़ती थी। दोनों में तनातनी हो जाती थी और कई - कई दिन तक बोलचाल भी बंद रहती। पांचवीं तक ऐसे ही चला।

अंशू तो यहीं पढ़ती रही , अभिनव का अडमिशन महर्षि विद्या मंदिर में हो गया। स्कूल छोड़ने के दौरान का अभिनव एक दिलचस्प वाकया सुनाते हैं। वह बताते हैं कि यह कहानी तो बनने के पहले ही खत्म हो गई थी। अंशू ने स्कूल छोड़ने के दौरान ही उनसे कभी न मिलने को कहा था। बरसों तक बिना बात किए ही बीत गए। अंशू ने अब्दुल्ला कालेज में बी . कॉम शुरू कर दिया। वह जनकपुरी में कोचिंग लेती थी। कोचिंग में उसका दोस्त आकाश भी आता था। इसी बीच , अभिनव को इलाहाबाद एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से बीबीए करने का मौका मिल गया। वहां जाने से पहले आकाश से मिलने के लिए अभिनव कोचिंग पर आ गया। यहीं अंशू मिल गई। उसने कोई बात नहीं की और दोस्त से मिलकर घर लौट गया।

अगले दिन इलाहाबाद जाना था कि दोस्त ने अंशू से मिलने को कहा। ये इच्छा अंशू की ही थी। अभिनव बताते हैं कि वे फ्रेंडशिप - डे पर मिले और अंशू ने उनसे पुरानी बातें भूलकर दोस्त बनने को कहा। दोनों राजी हो गए और फिर बातचीत शुरू हो गई। वैलन्टाइंस डे आया तो अंशू ने अभिनव से अपने प्रेम का इजहार कर दिया। अभिनव के घरवालों को खबर बरसों पहले ही हो चुकी थी। एक साल पहले अंशू के घरवाले भी जान गए। किसी को कोई एतराज नहीं हुआ और दोनों की शादी तय हो गई।

अभिनव बताते हैं कि वैलन्टाइंस डे पर शादी भी ईश्वर की ही इनायत है। ये कुछ भी तय नहीं था। पंडितजी ने विचार के बाद 11 फरवरी या 15 मार्च मुफीद बताई। 11 फरवरी को होटल बुक कराने पहुंचे तो कहीं कुछ खाली नहीं मिला। दूसरी तारीखें 14 व 15 फरवरी निकली। 15 को फिर व्यस्तता पाई गई और अंतत : वैलन्टाइंस डे पर ही दोनों की शादी हुई।

अंशू के पिता और दवा के थोक कारोबारी गिरीश तालूजा कहते हैं कि बच्चों की खुशी से बढ़कर कुछ भी नहीं है। वे कहते हैं कि बच्चों के फैसले पर बड़ों ने मुहर लगा दी। वैलन्टाइंस डे के बारे में कहते हैं कि उनके दौर में रोजाना ही प्यार का दिन था। पर , अब वक्त बदल गया है और इसके मायने भी। अभिनव के पिता सुभाष महेश्वरी कहते हैं कि वैलन्टाइंस डे पर अभिनव - अंशू की शादी हुई। सभी इस यादगार मौके पर बड़े खुश हैं क्योंकि ऐसे मौके कहां आते हैं।


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