मैं अपने प्यार से हार गया...


तबस्सुम मेरे दूर के रिश्ते में लगती है। मैं दिल्ली में रहता हूं और वह यूपी में रहती है। पांच साल पहले जब मैं उसके घर पर गया था, तो वह मेरे सामने बहुत अलग ढंग से पेश आई और काफी प्यार भरे अंदाज में। कभी मेरे लिए कुछ खाने के लिए लाती तो कभी कुछ, मैं जहां बैठता वहीं चली आती। उस वक्त मैं बी.ए के द्वितीय वर्ष का छात्रा था। सारा दिन वह मुझसे बातें करती रही, कभी किसी बारे में तो कभी किसी बारे में। रात को खाने के बाद वह मुझे बहुत देर तक देखती रही और मैं उसे। मुझे ऐसा लगता था जैसे वह मुझसे कुछ कहना चाहती है।

फिर जब बहुत देर हो गई तो उसने मुझे अपने पास बुलाया। मैं थोड़ा घबरा गया, इतनी रात हो रही थी लगभग सभी सो चुके थे। मैं फिर उसके पास गया, उसने मुझे अपने पास बैठाया और कहा तुम्हें पता है मैंने तुम्हारा कितना इंतज़ार किया, आज मैं जितनी खुश हूं तुम उसका अंदाजा भी नहीं लगा सकते। काफी बातें करने के बाद कहती है कि नईम किसी ने मुझसे कहा है कि मेरी शादी दिल्ली में होगी। मैंने भी कह दिया इससे अच्छी क्या बात हो सकती है। उसके अगले दिन मैं, मेरे मामा ओर तबस्सुम कहीं घूमने गए और तबस्सुम के साथ पूरा दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। उसके बाद मुझे दिल्ली आना था, उसने काफी कोशिश की मुझे रोकने की। मैं चाहकर भी नहीं रुक पाया मेरे साथ मेरे बड़े भाई भी थे और मैं दिल्ली आ गया।

लेकिन, मेरा दिल हर वक्त उसी के बारे में सोचता रहता था। इसी तरह 3-4 महीने गुजर गए। चार-पांच महीने के बाद वह किसी संबंधी के साथ दिल्ली आ गई। जब वह हमारे घर आई तो मैंने पूछा कैसी हो, कैसे आना हुआ?उसने कहा कि तुम तो वहां से आने के बाद मुझे भूल ही गए। उसने कहा कि मेरे यहां आने की वजह सिर्फ तुम ही हो, तुम्हारे आने के बाद जो मुझ पर गुजरी है वह तुम नहीं जानते। मैं समझ चुका था कि वह मुझे प्यार करती है, लेकिन मैं चाहता था कि वह एक बार कह दे। मैनें एक पेज पर लिखा कि क्या तुम मुझसे प्यार करती हो? उसके बाद उसको दे दिया, कुछ देर के बाद उसने वापस दिया तो उसने सिर्फ हां लिखा था।

उसके बाद हमारा प्यार चलता रहा। मैं भी यूपी जाता रहा और उसकी मम्मी भी मुझे पसंद करती थी। मैं सोचता था कि मुझे कुछ कहना नहीं पड़ेगा और हम दोनों की शादी हो जाएगी, लेकिन अभी जुलाई 2008 में जब मैंने सुना उसका रिश्ता उसी के मौसी के लड़के के साथा तय हो गया। मुझे ऐसा लगा मानो कोई मेरी सांसे मुझसे छीन रहा हो, मैं उसी दौरान वहां गया और मैंने तबस्सुम से पूछा। उसने कहा कि हां यह सच है कि मम्मी मेरा रिश्ता वहां करने वाली है। मेरी आंखो से आंसू निकल आए, मैंने पूछा कि क्या तुम इस रिश्ते से खुश हो? तबस्सुम ने कहा कि मुझे खुशी नहीं है, मैंने उससे बहुत कहा कि उस रिश्ते से क्या लाभ जिसमें खुशियां न हो। मैंने यह भी कहा कि तुम मेरा साथ दो मैं तुम्हारी मम्मी से बात करता हूं। जब पूछा जाए तो तुम्हें सिर्फ यह कहना है कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो, लेकिन यहां उसने मेरा साथ नहीं दिया। उसने कहा कि नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती, मैं सबके सामने कैसे कह सकती हूं। मुझमें इतनी हिम्मत नहीं है।

बस यहां मैं हार गया, मैं खुद अपने प्यार से हार गया।बस इतना कह कर आ गया कि तबस्सुम तुम खश रहो, जिंदगी के किसी भी मोड़ पर तुम्हें मेरी जरूरत हो तो मुझे पुकारना, तुम देखोगी कि नईम उस वक्त भी तुम्हारा इंतज़ार कर रहा होगा। जिसको हम प्यार करते हैं, उसे खुश देखना है भले ही उसमें हमें कितने ही गम क्यों न सहने पड़े। फिर मैं वहां से चला आया। यह सब मैं कह तो आया, लेकिन जो मुझ गुजरी वो मैं ही जानता हूं। अभी 15 जनवरी 2009 में ही उसकी सगाई हुई है। जिससे उसकी सगाई हुई है वह लड़का दुबई में कारपेंटर का काम करता है। वह घर-परिवार से अच्छा अमीर है। शायद उसकी मम्मी ने यही सोचकर मुझे अनदेखा किया होगा। मुझे कोई शिकायत नहीं है। उन्होंने जो किया वह अच्छा ही किया होगा, क्योंकि सभी के माता पिता अपने बच्चों के लिए अच्छा ही करते हैं।

लेकिन अब मुझे उसकी बहुत याद आती है। हर रोज ऑफिस आता हूं, पहले उसकी स्कैन की हुई तस्वीर को देखता हूं और यादों में खो जाता हूं। दिन बस उसके ही खयालों में कब कट जाते हैं पता ही नहीं चलता, पता नहीं उसके बिना यह ज़िंदगी कैसे गुजरेगी। मैं उससे बहुत प्यार करता हूं।


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