आज भी उसका इंतजार


मेरा नाम देव गौतम है। यह उन दिनों की बात है जब में क्लास 7 में था। उस दिन एक जनवरी थी जब मैंने उसे पहली बार देखा और बस देखता ही रह ग्या। उसका नाम शिप्रा सोलंकी था। पता नहीं मुझे क्या हुआ बस मैं उसे ही देखता रह गया। अगले दिन मैंने उसे अपनी ही क्लास में देखा और मैं पहली बार इतना खुश हुआ कि मेरे से ज्यादा कोई खुशनसीब ही ना हो। मैं उसे सातवीं क्लास में ही प्यार करने लगा। मैं उस टाइम सिर्फ 13 साल का था पर मैं उसे बहुत प्यार करने लगा था। शायद उसे इस बात का पता था पर मैंने कभी भी उसे कुछ नहीं कहा। मैं डरता था कि अगर मैं उसे प्रपोज़ करूंगा तो वह मुझसे बात करना बंद ना करदे बस इसी डर से मैंने उसे कभी भी प्रपोज़ नहीं किया। फिर एक दिन उसने मुझे अपने बर्थडे पर इनवाइट किया और मैं उस दिन बहुत खुश था। जब मैं उसके घर जा रहा था तो मेरा रास्ते में ही ऐक्सिडेंट हो गया और मुझे बहुत चोट भी लगी पर मैंने अपनी परवाह ना करते हुए उसके घर पर गया और वो भी मुझे देकर बहुत खुश हुई। पर जब मैंने उसे बतया कि मेरा रास्ते में ऐक्सिडेंट हो ग्या था तो उसने मुझे बहुत डांटा। जब उसने अपना बर्थडे केक कटा तो उसके फ्रेंड्स ने उसको बहुत अच्छे गिफ्ट्स दिए। सबसे लास्ट में मैंने उसे गिफ्ट दिया और गिफ्ट था रिंग। उसे उसने रख लिया। अगले दिन जब वह स्कूल आई तो मैंने उसके हाथों में अपनी रिंग देखी थी। पर मैं उसे कभी भी प्रपोज़ नहीं कर पाया। और वह 2008 में बंगलुरु चली गई। मैंने उसके सिवा आज तक किसी से प्यार नहीं किया। उसके बाद 2010 मे दिल्ली आ गए ओर मैं उसके घर उसे मिलने के लिए गया था। फर्स्ट टाइम उसने मेरा हाथ पकड़ा। उसे टाइम तो समझो कि दुनिया की हर खुशी मिल गई हो हमने बहुत सी बातें की ओर उसे मैंने बता भी दिया कि मैं तुमसे प्यार करता हुं और उस टाइम उसने मुझे कोई जवाब नहीं दिया। मुझे मालूम है कि वह मुझसे प्यार करती है पर उसने अभी तक कुछ नही कहा है। मुझे 6 साल हो गए हैं मैं अभी भी उसका इंतज़ार कर रहा हुं। मैं उसे आज भी बहुत प्यार करता हुं। बस मैं चाहता हूं कि मेरी इस कहनी को छाप कर उसके पास तक पहुंचा दें। मैं उनका अहसान कभी नहीं भूलूंगा और मैं चाहता हुं कि इस वैलंटाइंस को मेरा प्यार मुझे मिल जाए।

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