मन से हुए हम एक-दूसरे के


मेरे ऑफिस में एक लड़की एक साल से काम करती थी। उसके बी.ए. के एग्जाम थे मुझसे 15 दिन के लिए छुट्टी लेकर चली गई। मगर अगले दिन से मुझे उसका फोन आने लगा 2-3 दिन बाद ना जाने मुझे क्या हुआ कि उसके फोन का इंतज़ार होने लगा जब उसका फोन सुबह 11 बजे तक ना आए तो मुझे बेचैनी सी होने लगती। 7-8 दिन बाद सुबह और शाम को बात होने लगी। वह 15 दिन बाद छुट्टी से वापस आई, हम दोनों ने ऑफिस से छुट्टी की और लोधी गार्डन चले गए वहां पहुचते ही ऊपरवाले की मंशा थी, मौसम भी हमारे साथ हो लिया और बूंदा-बांदी होने लगी। हम बारिश की बूंदों से बचने के लिए एक छाते से पेड़ की आड़ मे खड़े हो गए हमें पता नहीं चला कि हम दो से एक कब हो गए। ऐसा लगने लगा मानो हम एक दूसरे को सालों से जानते हों। उसे मेरे बारे में सब पता था कि मैं दो बच्चों का बाप हूं। तब मेरी उम्र 34 साल थी और वो 20 साल की कुंआरी लड़की। वो ये भी जानती थी कि मैं अपनी पत्नी को बेहद चाहता हूं और मैंने भी उसे साफ कहा था की मैं तुम्हे प्यार करता हूं मगर तुम मेरी पत्नी का दर्जा नहीं ले सकती। हमारा प्यार दिनों दिन बढ़ता गया, यहां तक कि हम दोनों ने मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर जयमाला एक-दूसरे के गले में डाली और मन ही मन पति-पत्नी बन गए। उसके लिए कई रिश्ते आए उसने इनकार कर दिया। मैंने उसके सामने शादी का प्रस्ताव रखा, उसने साफ कह दिया कि मैं दीदी यानी मेरी पत्नी और बच्चों की जिंदगी खराब नहीं कर सकती। हमारा प्यार 5 साल का हो गया अब उसकी उम्र 25 साल थी अब तक जितने रिश्ते आए ठुकरा दिए और घर में साफ कह दिया मुझे शादी नहीं करनी। एक दिन उसे पुराना क़िला ले गया और उसको साफ कह दिया या तो जहां रिश्ता आता है रिश्ता कर लो या मुझसे शादी कर लो और अगर मेरी बात नहीं मानोगी तो मैं तुम्हारा जीवनभर मुंह नहीं देखूंगा। आखिर 4 घंटे समझाने के बाद वो तैयार हो गई और घरवालों की मर्जी से शादी कर ली। उसकी शादी में मैं उसके गांव गया। आज उसकी शादी को 7 साल हो गए 2 लड़कियां हैं। आज उसके मायके, ससुराल और मेरे परिवार के अच्छे रिश्ते बन गए हैं जबकि हम दोनों अलग-अलग स्टेट से हैं। आज भी हम प्यार करते हैं एक-दूसरे की परिवारिक उलझानों को सुलझा कर। सच मानो दोस्तों तो मेरा प्यार आज भी जिंदा है और जिंदा रहेगा। आज हम दोनों अपने प्यार के रिश्तों को निभाते हैं, रिश्तों को निभाने में या समाज में सही दिशा दिखाने में। मैं तो ये कहूंगा प्यार को हासिल करना ही प्यार नहीं है बल्कि त्याग, बलिदान जीवन को समझना ही प्यार है। जैसे कि मैंने अभी तक उस लड़की का नाम और अपना नाम नहीं बताया क्योंकि नाम लिखने से ये दो नाम जहां भी किसी के परिवार में आएंगे वहां एक शक की दीवार खड़ी हो जाएगी।

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