अनवतीर्ण (पेट में अटके) वृषण

वृषण भ्रूणीय ज़िन्दगी की शुरू-शुरू की अवस्था में ही बन जाते हैं। भ्रूण में ये उदर में बनते हैं। कभी-कभी एक या दोनों वृषण पूरी तरह उदर में नहीं खिसकते। जन्म के तुरन्त बाद इसका इलाज किया जाना ज़रूरी है क्योंकि उदरीय गर्मी या उपस्थ (पेट और जाँघों के बीच का हिस्सा) में चोट के कारण वृषण काम करना बन्द कर सकते हैं।