वीरभद्रासन




यह आसन वीरभद्रासन 1 का ही दूसरा हिस्सा है। यह आसन आपकी पीठ, जंघाओं, पेट और ह्रदय की पेशियों को मज़बूत करता है।

आसन विधि: वीरभद्रासन 1 वाले चरणों का अनुसरण करें, पर हाथों को सर से ऊपर उठाने के बजाय इस बार अपने धड़ को इस तरह ट्विस्ट करें कि आपका शरीर बगल की ओर इंगित हो और अपने हाथों को दोनों तरफ उठाएं (आपकी उंगलियाँ खुली होनी चाहिए और दोनों तरफ फैले हुए आपके बाएँ और दाएं पैर के समानान्तर होने चाहिए)। अब अपना सर घुमाएं ताकि आप उसी और देख रहे हों जिस और आपका दायाँ हाथ है। पूरी प्रक्रिया को बाएँ पैर के लिए दोहराएं।

ध्यान दें: यदि आप डायरिया से पीड़ित हैं तो यह आसन न करें।


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