बहिरात्मा में स्थित व्यक्ति के लक्षण


बहिरात्मा को मूर्ख और जड़ आत्मा भी कहा जाता है| आत्मा को छोड़कर जो वस्तुओं में अधिक लीन रहता है वह मूर्ख आत्मा है| मैं गौरा हूँ, मैं काला हूँ, मैं मोटा हूँ, मैं दुबला हूँ, मैं क्षत्रिय हूँ, मैं जैन हूँ, मैं ब्राम्हण हूँ, मैं जवान हूँ, मैं रूपवान हूँ, मैं बहादुर हूँ, मैं ज्ञानी हूँ, मूर्ख ऐसा मानकर गर्व करता है| फिर उस गर्व के कारण उसे बहुत दुख उठाना पड़ता है |

मूर्ख आत्मा माता-पिता, पति-पत्नि, पुत्र-पुत्री,घर व इन्द्रियों के विषयों में बहुत अधिक लीन रहते हैं और उनसे अलग होते ही व्याकुल होकर मानसिक तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं | इस तरह की आत्मा वाले ना अपना विकास कर पाते और ना औरों के विकास में सहयोग दे पाते हैं | उनका कोई अच्छा मित्र नहीं बन पाता, जिससे उनकी वृद्ध अवस्था दयनीय हो जाती है| वे मनुष्य होकर भी मनुष्य जीवन का भरपूर आनंद नहीं ले पाते |


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