परिचय


आत्मा सफेद नहीं है, काला नहीं है, लाल नहीं है,.आत्मा सूक्ष्म भी नहीं है और स्थूल भी नहीं है|वह ज्ञान स्वरुप है | उसे योगी ज्ञान से ही जानता है |तुम इसे ज्ञानमय जानो |

आत्मा ब्राम्हन नहीं है, वैश्य नहीं है, क्षत्रिय नहीं है, क्षुद्र भी नहीं है | पुरूष, नपुंसक व स्त्रीलिंग भी नहीं है | इन सबको ज्ञानी विशेषरूप से जानता है|

आत्मा बुद्ध नहीं है, दिगम्बर नहीं है, आत्मा श्वेताम्बर भी नहीं है, आत्मा किसी भी वेश का धारी नहीं है , वह मात्र एक ज्ञान स्वरूप है, उसको योगी ध्यान से ही जानते है|

आत्मा गुरु नहीं है, शिष्य भी नहीं है, स्वामी नहीं है, नौकर भी नहीं है, शूरवीर नहीं है, कायर भी नहीं है, उच्च कुली भी नहीं है और नीच कुली भी नहीं है |

आत्मा मनुष्य नहीं है, देव भी नहीं है, आत्मा तिर्यन्च पशु भी नहीं है, आत्मा नारकी भी नहीं है, परन्तु ज्ञान स्वरूप है|

आत्मा विध्यावान व मूर्ख नहीं है,धनवान व दरिद्र भी नहीं है, जवान, बूढा और बालक भी नहीं है |


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