मृत्यु का हिसाब-किताब रखने का कार्य लाल किताब | आत्मा के रहस्य | Aatma ke Rahasya : Mirchi Facts Untitled Document

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मृत्यु का हिसाब-किताब रखने का कार्य


मृत्यु के देवता यम पृथ्वीलोक पर रहने वाले प्राणियों के कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नरक भेजने का काम करते हैं। यम इस प्रकार के फैसले लेने में बहुत उलझन और दुविधा में पड़ जाते थे। उन्होंने अपनी यह समस्या ब्रह्मा और शिवजी को बताई, तब ब्रह्माजी ध्यानलीन हो गए और एक हजार वर्ष की तपस्या के बाद एक पुरुष उत्पन्न हुआ।

विस्तार से चित्रगुप्त की कथा

इस पुरुष का जन्म ब्रह्माजी की काया से हुआ था अत: ये कायस्थ कहलाए और इनका नाम चित्रगुप्त पड़ा। भगवान चित्रगुप्तजी के हाथों में कर्म की किताब, कलम, दवात और करवाल हैं। ये कुशल लेखक हैं और इनकी लेखनी से जीवों को उनके कर्मों के अनुसार न्याय मिलता है।

चित्रगुप्तजी के गुणों यथा सतर्कता, सहजता, यथार्थता, सटीकता और व्यावसायिकता आदि के कारण उन्हें यम के अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। उक्त गुणों के आधार पर चित्रगुप्त पृथ्वी पर रहने वाले जीवों का लेखा-जोखा व अच्छे-बुरे कार्यों का हिसाब पूरी परिपूर्णता के साथ करते हैं। फिर मृत्यु के देवता यम, जीवों के कार्यों के अनुसार उन्हें स्वर्ग व नरक में भेजने का फैसला करते हैं। इन्हीं के आधार पर मृत्यु के बाद जीव फिर किस योनि में जाएगा, का निर्धारण भी होता है।

चेतावनी : कुछ वर्षों में देखा गया है कि कविता, चुट‍कुलों और हास्य शो के द्वारा चित्रगुप्त और यमराज का मजाक बनाया जाता है। ऐसा करने और ऐसा सुनने वाले अंतकाल में पछताएंगे। जिन्होंने वेद-पुराण पढ़े हैं निश्चित ही वे यमराज के संबंध में सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल करेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि यम के अपमान का परिणाम क्या होता है।





















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