आत्मा का रंग कैसा है?


यह दुनिया रंग-बिरंगी या कहें कि सतरंगी है। सतरंगी अर्थात सात रंगों वाली। लेकिन आत्मा का कोई रंग पता नहीं चला है।ध्यान, धारणा, समाधि और पूजापाठ से लेकर मृत्यु के बाद वापस शरीर में लौटे लोगों तक आत्मा और परलोक के अनुभव बताते हैं पर उसका रंग कोई नहीं बताता।अध्यात्म विज्ञान की दिशा में शोध प्रयोग कर रहे कुछ अनुसंधान करने वालों ने इस दिशा में काम शुरु किया है। इस तरह के प्रयोगों में लगे पांडीचेरी के प्रो. के सुंदरम ने कहा है कि आत्मा का भी रंग होता है।रंगों का विश्लेषण करते हुए प्रो. सुंदरम का कहना है कि मूलत: पांच तरह के रंग ही होते हैं, जैसे काला, सफेद, लाल, नीला और पीला। इनमें भी काला और सफेद कोई रंग नहीं है। रंगों की अनुपस्थिति काला रंग बनता है और सभी रंगों की उपस्थिति सफेद रंग का आभास कराता है।इस तरह तीन ही रंग प्रमुख हो जाते हैं- लाल, पीला और नीला। अध्ययन और प्रयोगों को आगे बढ़ाते हुए प्रो, सुंदरम और उनके सहयोगियों ने शरीर में मौजूद सात चक्रों का रंग रुप भी खंगाला।

चक्रों पर किए प्रयोग के बाद उन्होंने कहा है कि आत्मा का रंग या तो नीला होता है अथवा आसमानी।नीले रंग को वे थोड़ा निरस्त भी करते हैं क्योकि प्रकाश के रुप में आत्मा ही दिखाई पड़ती है और पीले रंग का प्रकाश आत्मा की उपस्थिति को सूचित करता है। धरती पर पचहत्तर प्रतिशत जल ही फैला है और जहां भी वह घनीभूत होता है वहां आकाश का रंग प्रतिबिंबित होने के कारण पानी का रंग नीला दिखाई देता है।ध्यान में हुए अनुभवों और सपनों में दिखाई देने वाले उदास रंगों के आधार पर उन्होंने कहा है कि आत्मा का रंग आसमानी है। कुछ मनीषी मानते हैं कि नीला रंग आज्ञा चक्र का और आत्मा का रंग है। आज्ञाचक्र शरीर का आखिरी चक्र है। यह सात में से छठा है, सातवां सहस्रार चक्र शरीर और आत्मा के बीच सेतु का काम करता है। उसका अपना कोई रंग नहीं है। इसलिए नीला और आसमानी रंग ही आत्मा का रंग कहा जा सकता है।


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