शौच-विज्ञान

सहजता से मलत्याग न होने पर कुछ लोग जोर लगाकर शौच करते हैं किंतु ऐसा करना ठीक नहीं है। उषःपान (प्रातः जल सेवन) के बाद कुछ देर भ्रमण करने से मलत्याग सरलता से होता।
यदि कब्ज रहता हो तो रात को पानी में भिगोकर रखे मुनक्के सुबह उबालकर उसी पानी में मसल लें। बीज निकाल कर मुनक्के खा लें और बचा हुआ पानी पी लें। अथवा रात्रि भोजन के बाद पानी साथ त्रिफला चूर्ण लेने पर भी कब्ज दूर होता है। साधारणतया सादा, हल्का आहार लेने तथा दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने से कब्ज मिट जाता है।
सिर व कान ढँक जाये ऐसी गोल टोपी पहनके, मौनपूर्वक बैठकर मल-मूत्र का त्याग करना चाहिए। इस समय दाँत भींचकर रखने से वे मजबूत बनते हैं।
शौच व लघुशंका के समय मौन रहना चाहिए।
मल-विसर्जन के समय बायें पैर पर दबाव रखें। इस प्रयोग से बवासीर रोग नहीं होता।
पैर के पंजों के बल बैठकर पेशाब करने से मधुमेह की बीमारी नहीं होती।
भोजन के बाद पेशाब करने से पथरी का डर नहीं रहता।

 


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