शयन

पूर्व अथवा दक्षिण दिशा की ओर ही सिर करके सोना चाहिए, इससे जीवनशक्ति का विकास होता है तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है। जबकि उत्तर व पश्चिम दिशा की ओर सिर करके सोने से जीवनशक्ति का ह्रास होता है व रोग उत्पन्न होते हैं।
हाथ-पैरों को सिकोड़कर, पैरों के पंजों की आँटी (क्रास) करके, सिर के पीछे तथा ऊपर हाथ रखकर व पेट के बल नहीं सोना चाहिए।
सूर्यास्त के दो ढाई घंटे बाद सो जाना व सूर्योदय से दो ढाई घंटे पूर्व उठ जाना उत्तम है।
शास्त्राध्ययन करके प्रणव(ॐ) का दीर्घ उच्चारण करते हुए अथवा श्वासोच्छवास में भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए सोने से नींद भी उपासना हो जाती है।
स्वस्थ रहने के लिए कम-से-कम छः घंटे और अधिक से अधिक साढ़े सात घंटे की नींद करनी चाहिए, इससे कम या ज्यादा नहीं।
जब आप शयन करें तब कमरे की खिड़कियाँ खुली हों और रोशनी न हो।


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