पारिजात योग


पारिजात योग का निर्माण तब होता है जब जन्म पत्रिका में लग्रेश जिस राशि में होता है उस राशि का स्वामी कुंडली में उच्च स्थान पर हो या अपने घर में हो। छत्र योग जिस व्यक्ति की जन्म पत्रिका में होता है वह व्यक्ति जीवन में निरंतर प्रगति करता हुआ उच्च पद को प्राप्त करता है। इस योग को भगवान की छत्रछाया वाला योग कहा जा सकता है। यह योग तब बनता है जब कुंडली में चतुर्थ भाव से दशम भाव तक सभी ग्रह मौजूद हों या फिर दशम भाव से चतुर्थ भाव तक सभी ग्रह उच्च स्थिति में हों। तीन भावों में दो-दो ग्रह हों या तीन भावों में एक-एक ग्रह स्थित हों तब शुभ योग बनता है। यह योग नंदा योग के नाम से जाना जाता है। इस योग वाला जातक स्वस्थ एवं दीर्घायु होता है। इस योग से प्रभावित व्यक्ति का जीवन सुखमय रहता है।

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