गजकेसरी योग


गजकेसरी योग को असाधारण योग की श्रेणी में रखा गया है। यह योग जिस व्यक्ति की कुंडली में उपस्थित होता है उसे जीवन में कभी भी अभाव नहीं खटकता। इस योग के साथ जन्म लेने वाले व्यक्ति की ओर धन, यश और र्कीत स्वत: खिंची चली आती है। जब कुंडली में गुरु और चंद्र पूर्ण कारक प्रभाव के साथ होते हैं तब यह योग बनता है।

लग्र स्थान में कर्क, धनु, मीन, मेष या वृश्चिक हो तब यह कारक प्रभाव के साथ माना जाता है। हालांकि अकारक होने पर भी फलदायी माना जाता है परन्तु यह मध्यम दर्जे का होता है चंद्रमा से केंद्र स्थान में 1, 4, 7, 10 बृहस्पति होने से गजकेसरी योग बनता है। इसके अलावा अगर चंद्रमा के साथ बृहस्पति हो तब भी यह योग बनता है। पारिजात योग भी उत्तम योग माना जाता है। इस योग की विशेषता यह है कि यह जिस व्यक्ति की कुंडली में होता है वह जीवन में कामयाबी और सफलता के शिखर पर पहुंचता है परन्तु रफ्तार धीमी रहती है यही कारण है कि मध्य आयु के पश्चात इसका प्रभाव दिखाई देता है।


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