कुण्डलियों में नवम भाव बृहस्पति गृह


यदि कन्या धर्मपरायण है और वर विपरित प्रवृति का है तो भी बैमनस्य उत्पन्न हो सकता है। अत दोनों की कुण्डलियों में नवम भाव बृहस्पति गृह की स्थिति और बल का अवलोकन करना बी अति आवश्यक है। विवाह के उपरांत संतान की कामना भी स्वभाविक है। बृहस्पति गृह संतान का कारक ग्रह है। यदि वर का यह पक्ष दुर्बल है तो कन्या का दुर्बल होना चाहिए। पति पत्नि के आपसी रिश्तों की मजबूरी के कारण शुक्र तथा व्ययेश ग्रह है। इस पक्ष की ग्रहण विश्लेषण की आवश्यकता आज के युग में आति महत्वपूर्ण है।

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