परिचय




पूर्व जन्म के जो पाप होते हैं उनका परिणाम वर्तमान जन्म में भोगना पड़ता है। दुख, ग्रह क्लेश,बीमारी एवं अन्य परेशानियों का कारण होते हैं शनि ग्रह। जातक की जन्म कुण्डली में शनि जिस स्थान पर बैठे हों उस स्थान से संबंधित कार्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। शनि भाग्य विधाता हैं। धर्म और कर्म के देवता भी माने जाते हैं।

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