अष्टकूट गुण मिलान में ध्यान रखें


1 शुद्ध भकूट और नाड़ी दोष रहित 18 से अधिक गुण हों तो विवाह शुभ मान्य होता है।

2 अशुद्ध भकूट (द्विद्र्वादश, नवपंचम, षड़ाष्टक) होने पर भी यदि मित्र भकूट की श्रेणी में हो तो 20 से अधिक गुण होने पर विवाह श्रेष्ठ माना जाता है।

3 शत्रु षड़ाष्टक (6-8) भकूट दोष होने पर विवाह नहीं करें। दाम्पत्य जीवन में अनिष्ट की संभावना रहेगी।

4 मित्र षड़ाष्टक भकूट दोष में भी पति-पत्नि में कलह होती रहती है। इसलिए षड़ाष्टक भकूट दोष में विवाह करने से सदैव बचना चाहिए।

5 नाड़ी दोष के साथ यदि षड़ाष्टक भकूट दोष (चाहे मित्र षड़ाष्टक हो अथवा दोनों की राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो) हो तो, विवाह कदापि नहीं करें।

6 शुद्ध भकूट से गुण-दोष का परिहार स्वत: ही हो जाता है।


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