जन्म कुंडली में ग्रहो की चाल




शनि, सूर्य, राहु, 12वें भाव का स्वामी (द्वादशेश ) तथा राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी (जैसे राहु मीन राशि में हो तो, मीन का स्वामी गुरु राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी होगा) ये पांच ग्रह विच्छेदात्मक प्रवृति के होते हैं। इनमें से किन्हीं दो या अधिक ग्रहों का युति अथवा दृष्टि संबंध जन्म कुंडली के जिस भाव/भाव स्वामी से होता है तो उसे नुक्सान पहुंचाते हैं। अत: सप्तम भाव अथवा उसके स्वामी को इन ग्रहों द्वारा प्रभावित करने पर दाम्पत्य जीवन में कटुता आती है।

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