परिचय


काल पुरुख जिसकी कल्पना हम ज्योतिष शास्त्र में करते हैं और जिसके रचयता ब्रह्माजी हैं और जो सम्पूरण जातकों का प्रतिनिधितव भी करता है वह असल में किस प्रकार से कार्य करता है ! यहाँ पर विचारणीय बात ये भी है की जिस लाल किताब का आज इतना प्रचार किया जा रहा है वो भी इसी काल पुरुख लगन से प्रेरित है और उसका महत्व उपचार पर ज्यादा है , इसी प्रकार से अंक विद्या , केपी सिस्टम जो की बहुत ही सटीकता से फोरकास्टिंग करता है और न जाने कितने सिस्टम हैं ज्योतिष विद्या में वे सब के सब अपने आप में महत्व पूरण माने जाते हैं पर उन सब का आधार यही काल पुरुख कुंडली माना जाता है , इसके बाहर तो ज्योतिष शास्त्र की कल्पना करना भी बेकार है !

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