युवाओं में सिक्स पैक का जूनून


संदीदा अभिनेताओं और खिलाड़ियों की देखा देखी सिक्स पैक एब्स बनाने के चक्कर में बहुत अधिक जिम करने तथा स्टेरायड का इस्तेमाल करने से युवाओं की हडि्डयों के गलने का खतरा बढ़ रहा है। अस्थि विशेषज्ञों का कहना है कि आज बहुत अधिक समय तक जिम करने, गलत तरीके से व्यायाम करने तथा मांसपेशियों को मजबूत बनाने के नाम पर ली जाने वाली दवाइयों एवं स्टेरायडस के कारण 16 से 30 साल के युवा भी हडि्डयों की समस्याओं के शिकार बन रहे हैं। वरिष्ठ अस्थि चिकित्सक एवं आमर्टिस हास्पिटल के ज्वाइंट रिक्ंसट्रक्शन विभाग के प्रमुख डा सुभाष जांगिड ने कहा कि एक सीमा तक जिम में व्यायाम करना स्वास्थ्य की दृष्टि से फायदेमंद हैं लेकिन गलत तरीके से और बहुत अधिक भारी व्यायाम करने तथा स्टेरायडस आदि का इस्तेमाल करने से हडि्डयां गल सकती है।

डा. जांगिड कहते हैं कि युवा पीढी में खुद को फिट एवं चुस्त, दुरूस्त दिखाने-दिखने की प्रवृति बढी है और वे कम उम्र से ही अपने पसंदीदा फिल्म स्टार की तरह का लुक देने के लिये जिम में जाने लगते हैं और ट्रेनरों के बगैर या अप्रशिक्षित टे्रनरों की निगरानी में व्यायाम शुरू कर देते हैं। अक्सर जिम में गलत तरीके से एवं गलत पास्चर में खड़े होकर बहुत ज्यादा वजन उठाते हैं इसके कारण घुटने एवं अन्य जोडों के उंत्तक टूटते हैं और आसपास की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। लंबे समय तक ऐसा करने से घुटने एवं अन्य जोड़ों को नुकसान पहुंचता है।

डा जांगिड के अनुसार रोजमर्रा के कामकाज के लिए जरूरी भागदौड़ और साइक्लिंग आदि से घुटने एवं अन्य जोड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता है। यही नहीं एथलीटों को भी बहुत अधिक दौडने या खेल-कूद के कारण आम तौर पर कोई नुकसान नहीं पहुंचता है लेकिन जिम में अक्सर अप्रशिक्षित ट्रेनरों के होने तथा क्षमता से बहुत अधिक भार उठाने के कारण घुटने एवं अन्य जोड़ों को नुकसान पहुंचता है। अस्थि चिकित्सा विशेषज्ञ डा. संजय स्वरूप बताते हैं कि बहुत अधिक जिम के अलावा गलत तरीक से बैठने के कारण भी घुटने खराब होते हैं। उनके अनुसार घुटने को बहुत अधिक मोडकर अधिक समय तक बैठने की आदत के कारण घुटने पर अधिक दबाब पड़ता है जिससे घुटने जल्दी खराब होते हैं। ऐसा भारत में ही नहीं अन्य एशियाई देशें में भी होता है।

डा जांगिड कहते हैं कि बहुत अधिक जिम जाने तथा गलत तरीके से उठने बैठने के अलावा फास्ट-फूड आदि के बढते चलन के कारण भी हडि्डयों को नुकसान पहुंच रहा है। इसके कारण आर्थराइटिस एवं ओस्टि्रयोपोरोसिस की समस्या बढ रही है और आज कम उम्र में ही घुटने को बदलवाने की नौबत आने लगी है


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