नकारात्मक भावनाएं भी बढ़ाती हैं वजन


कहा जाता है, हम जैसे एक्ट करते हैं,  शरीर वैसे ही रिएक्ट करता है। तनाव, कुंठा जैसी नकारात्मक भावनाओं का स्वास्थ्य, खासकर वजन पर विपरीत असर पड़ता है। अकसर मोटापे और खाने को एक-दूसरे से संबंधित माना जाता है, लेकिन हाल-फिलहाल अमेरिका में हुई शोध के नतीजे कहते हैं कि खाना उतनी बड़ी समस्या नहीं-जैसा कि माना जाता रहा है। दरअसल कई नकारात्मक भावनाएं भी वजन बढ़ाती हैं।

खुद से पूछें  

  1. क्या किसी खास घटना के बाद आपका वजन बढ़ा? मसलन माता-पिता की मौत, तलाक, बच्चे के जन्म जैसी घटनाओं के बाद। 
  2. जब आप नाखुश होते हैं-ज्यादा खाते हैं? 
  3. अवसाद की स्थिति में कुछ अलग खाने की इच्छा होती है आपकी?
  4. क्या आपका वजन घटता-बढ़ता रहता है? 
  5. क्या किसी अच्छे या बुरे दिन के बाद आप चिड़चिड़ाहट या थका महसूस करते हैं?  

अगर इन सवालों के ज्यादातर जवाब 'हां' में हैं तो आप भावनाओं से संचालित होते हैं।

तीन नकारात्मक भावनाएं  


भय या असुरक्षा यदि आपके भीतर है तो आपका वजन नियंत्रित नहीं हो सकता। हो सकता है यह भय बचपन से हो। बच्चे के जन्म के बाद स्ति्रयों में यह असुरक्षा कि वे सुंदर नहीं रहीं-ऐसी ही नकारात्मक भावना है।

उदासीनता भी वजन बढ़ाने में मददगार है। केवल साधु-महात्मा ही हर स्थिति में समभाव रखते हैं। आम व्यक्ति को घटनाएं प्रभावित करती है। कई लोग हर स्थिति में तटस्थ रहते हैं। इनमें ज्यादातर वे होते हैं, जिन्हें बचपन में अपमानित होना पड़ा हो, उपहास का पात्र बनना पड़ा हो। इससे उनकाआत्मविश्वास खत्म होता है और शारीरिक स्थिति पर प्रभाव पड़ता है, जो कई बार जिंदगी भर रह जाता है।

घृणा या क्रोध से भी वजन प्रभावित होता है। यदि किसी कारणवश आप अपने शरीर से घृणा करने लगें तो भी आपका वजन बढ़ने लगता है।  नकारात्मक बातों को पहचानने के लिए अतीत में लौटें और सोचें-  

  1. क्या आप अभिभावकों को खुश करने के लिए खाना खाते थे?  
  2. भोजन को लेकर कोई अपराधबोध तो आपके भीतर नहीं था? 
  3. क्या परिवार में कलह या तनाव के चलते डाइनिंग टेबल पर टेंशन बना रहता था? 
  4. क्या खाने पर आप अपना गुस्सा निकालते रहे हैं? खाना आपके लिए सजा जैसा तो नहीं? 
  5. भावनात्मक प्रेम और स्नेह मन के लिए उतना ही जरूरी है-जैसे शरीर के लिए खाना।  संबंधों में आघात, प्रियजन की मौत, पति से उपेक्षा, द़फ्तर में तनाव से भी कुंठा पनपती है, जिससे वजन अनियंत्रित होता है।  

बजाय इसके कि खाना खाते हुए कैलरी गिनें, सकारात्मक उपाय करें। साइकोथेरेपी से वजन को संतुलित करने में भी मदद मिलती है। फेशियल, बॉडी मसाज से भी आत्मविश्वास बढ़ता है।  शारीरिक स्वस्थता के साथ मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी है। नियमित योग और ध्यान से ही यह संभव है। 

  1. सोचें कि जिंदगी आपकी अपनी है और इसकी देखभाल आपको खुद करनी है। 
  2. अपने अवगुणों के सकारात्मक पक्ष के बारे में सोचें। यदि गुस्सा बुरा है तो उसकी व्याख्या यूं करें कि ़गुस्सा अपने रचनात्मक स्वरूप में आपके साहस का परिचायक भी है। 
  3. सोचें कि वजन क्यों घटाना चाहते हैं? कहीं ऐसा तो नहीं आप दूसरों को प्रभावित करने के लिए वजन घटाना चाहते हैं! सोचें कि क्या होगा यदि आप दुबले हो जाएंगे? 
  4. ऐसे तमाम कार्य करें जिनमें आनंद मिले। जैसे नृत्य, शारीरिक व्यायाम, स्विमिंग।

ध्यान दें वजन बढ़ना उतना बुरा नहीं, जितना उसके बारे में लगातार सोचना। भावनाएं सकारात्मक रखें, वजन खुद घट जाएगा।



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