प्रसव पीड़ा


प्रत्येक विवाहित स्त्री मां बनने को लालायित रहती है, अपितु उसे प्रसव के समय अपार कष्ट एवं परेशानियां भोगनी पड़ती हैं| कभी-कभी किन्हीं कारणवश स्त्री, बच्चे अथवा दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है| ऐसी स्थिति में विशेष रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता रहती है|

कारण
बच्चा गर्भाशय के बाहर सरलता से नहीं आता, बल्कि माता को बहुत कष्ट सहन करना पड़ता है| माता दर्द के कारण तड़प जाती है| आजकल तो स्त्रियां शारीरिक परिश्रम बहुत कम करती हैं, इसलिए वे बच्चे जनते समय अधमरी हो जाती हैं| कहा जाता है कि बच्चा जनने में स्त्री का दूसरा जन्म होता है| वर्तमान युग में ऐसी बहुत-सी दवाइयों तथा नुस्खों की खोज हो गई है जिनके सेवन से माता का प्रसव पीड़ा नहीं भोगनी पड़ती|

पहचान
बच्चे को जन्म देते समय माता को बहुत घबराहट होती है| उसे उल्टी, पूरे शरीर, पेड़ व पेट में दर्द, बेचैनी, योनि से स्त्राव तथा रक्त आने लगता है| ये प्रसव पीड़ा के आम लक्षण हैं|

नुस्खे
  • प्रसव पीड़ा के समय स्त्री को तुलसी के पत्तों का रस एक-एक चम्मच की मात्रा में थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलाना चाहिए|
  • चुम्बक पत्थर को रेशमी कपड़े में बांधकर स्त्री के बाएं हाथ में पकड़ा देना चाहिए| इससे बच्चा आसानी से पैदा हो जाता है|
  • तीन दाले लाल घुंघची लेकर महीन पीस लें| इसमें थोड़ा-सा पुराना गुड़ मिलाएं| फिर दोनों को अच्छी तरह खरल कर लें| इसे प्रसव के समय खिला दें| नुस्खा पेट में पहुंचने के 10 मिनट बाद बच्चा बिना दर्द के हो जाएगा|
  • अपमार्ग की जड़ को माता की कमर में डोरी में पिरोकर बांधने से प्रसव का कष्ट कम हो जाता है|
  • एरण्ड का तेल बार-बार नाभि पर लगाने से प्रसव शीघ्र हो जाता है|
  • प्रसव होने के आठ दिन पहले से माता को अंजीर का सेवन शुरू कर देना चाहिए|
  • प्रसूति के समय मकोय की जड़ पीसकर नाभि के नीचे लेप करना चाहिए| इससे प्रसव आसानी से हो जाता है|
  • प्रसव के समय स्त्री को गाजर के बीज तथा उसके पत्तों का काढ़ा पिलाना चाहिए|
  • थोड़ी-सी लौकी को उबाल लें| फिर उसका रस निचोड़कर 30 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर माता को दें| प्रसव पीड़ा कम हो जाएगी|


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