सुजाक और आतशक (उपदंश)


सुजाक और आतशक (उपदंश) यौन रोगों की बहुत ही घिनौनी बीमारियों में गिनी जाती हैं। यह रोग स्त्री और पुरुष दोनों को हो सकता है।

कारण- 

सुजाक या उपदंश रोग स्त्री और पुरुषों के गलत तरह के शारीरिक संबंधों के कारण होने वाले रोग है। जो लोग अपनी पत्नियों को छोड़कर गलत तरह की स्त्रियों या वेश्याओं आदि के साथ संबंध बनाते हैं उन्हें अक्सर यह रोग अपने चंगुल में ले लेता है। इसी तरह से यह रोग स्त्रियों पर भी लागू होता है जो स्त्रियां पराएं पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं उन्हें भी यह रोग लग जाता है।

उपदंश रोग के लक्षण-

गलत तरह के शारीरिक संबंधों के कारण होने वाले उपदंश रोग में रोगी व्यक्ति के जननांगों पर जख्म सा बन जाता है। अगर इस रोग के होने पर लापरवाही बरती जाती है तो यह जख्म रोगी के पूरे शरीर में फैल जाते हैं। इस रोग में रोगी के नाक की हड्डी और लिंग गल जाती है। इसके अलावा इस रोग में रोगी व्यक्ति के जोड़ों में दर्द रहने लगता है, स्त्री को बार-बार गर्भपात होने लगता है या बच्चा पैदा होकर मर जाता है या विकलांग पैदा होता है।

जानकारी-

उपदंश रोग के बारे में एक बात याद रखना जरूरी है कि यह रोग कई पीढ़ियों तक अपना असर दिखाता है। इस रोग का इलाज करवाते समय जब तक डाक्टर न कहे या पूरी तरह रोग के ठीक होने की तसल्ली न हो जाए तब तक इलाज करवाना बंद नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर इस रोग का विष शरीर में हल्का सा भी रह जाता है तो कुछ समय के बाद यह रोग फिर से पैदा हो जाता है। इसके लिए चिकित्सक द्वारा इलाज समाप्त करने के बाद एकबार खून की जांच (Kahn's Test or V.D.R.L or S.T.S) करवाकर रोग की समाप्ति की तसल्ली कर लेनी चाहिए।

सुजाक-

सुजाक रोग गलत किस्म की स्त्रियों के साथ बिना किसी सावधानी के सेक्स करने से होने वाला रोग है। इस रोग में रोगी व्यक्ति के लिंग के अंदर जख्म हो जाता है, मवाद बहता है, पेशाब करते समय जलन होती है और पेशाब बूंद-बूंद करके आता है।

सुजाक रोग से ग्रस्त रोगी जो अब ठीक तो हो चुका हो लेकिन उसके कोई संतान न पैदा हो रही हो तो उसे अपने वीर्य की जांच करानी चाहिए। सुजाक का जहर वीर्य के शुक्राणुओं को समाप्त कर देता है। इस रोग में वीर्य की जांच कराने पर ऊपर से देखने पर तो स्वस्थ मजबूत होता है लेकिन उसके अंदर गर्भ को ठहराने वाले शुक्राणु मौजूद नहीं होते हैं।



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