आयुर्वेद के अनुसार


आयुर्वेद की विचारधारा इस रोग के कारण व विषय के संबंध में भिन्न है जो रूचिकर है।

आयुर्वेद के अनुसार कोष्ठ में हाजमे की शक्ति व भोजन अवशोषण की क्षमता निहित होती है। जो भोजन हजम होता है वह इसमें प्रवेश करता है जिससे कोष्ठ में वसा की मात्रा बढ़ जाती है जो शरीर के कई रोगों का कारण बनती है।

वसा मस्कल टिशु, कूल्हे, पेट, छाती पर जमने लगती है जिससे शरीर असंतुलित सा दिखने लगता है और हमारे शारीरिक विकास को प्रभावित करता है।


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