मोटापे के कारण


शरीर के आंतरिक अंगों व त्वचा के मध्य वसा के जमने से भार में वृद्धि व मोटापा बढ़ता है। मेद या वसा वृद्धि इस रोग का सबसे बड़ा कारण है।

आयुर्वेद के अनुसार सात मूल टिश्यू तत्व मानव शरीर में होते है जिन्हें धातु कहा जाता है जो हर मानव शरीर में विद्यमान होते है यदि उनके संतुलन मंे थोड़ी भी गड़बड़ी होती है तो रोग उत्पन्न हो जाता है। वसा या मेद इन सप्त धातुओं में से एक है।

मेद या मेदा शरीर की ऊर्जा या गर्मी को बनाये रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है।

यह हमारे अंगों को धक्कों से बचाती है जिससे हम घायल होने से बच जाते है।

इसी से हमारा शरीर सुन्दर दिखाई देता है किंतु इसका अति विकास या जमा होना शरीर के लिये घातक बन जाता है।

मनुष्य में मोटापा केट्री सेलों के जमा होने पर निर्भर करता है।

यह तब तक हानि नहीं करता जब तक कि यह हमारे शरीर केरीक्यूलर तत्वों में समाविष्ट नहीं हो जाता विशेषकर मसल्स में जो खतरे का स्त्रोत है।

इसकी पहचान करना आसान है कि आप मोटे है या नहीं।

एक चिमटी अपने पेट की त्वचा पर चलाएँ यदि यह 2 इंच से मोटी है तो समझिये कि आप आवश्यकता से अधिक भारित है।

अधिक मीठा खाने से भी मोटापा बढ़ता है साथ ही ठंडे व असुरक्षित भोजन से भी मोटापा बढ़ता है जो व्यायाम के अभाव से, दिन में सोने से, मानसिक व्यायाम के अभाव में व वंशानुगतता के कारण बढ़ता है।


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