परिचय




मोटापा हमारे देश में फैला एक आम न्यूट्रीशनल रोग है। इससे लगभग 40% महिलाएँ और 20%पुरूष वर्ग पीडि़त है जो अपना वजन कम करने की तैयारी में संलग्न है। लाखों रूपये वजन घटाने के उपचार में प्रतिवर्ष भारत जैसे देश में खर्च हो जाते है।

आज इस रोग में वर्तमान मेडिकल उपचार असफल होने से इसकी दर और उच्च होती जा रही है। अधिकांश मामलों में भार पुनः बढ़ जाता है। लगभग एक तिहाई लोगों में अपना वजन कम किया था वे उसे एक वर्ष में पुनः प्राप्त कर चुके है और जो शेष बचे है वे 5 वर्ष में उसे पुनः प्राप्त कर लेंगे ऐसा विशेषज्ञों का मानना है।

एक अध्ययन के अनुसार सन 2010 तक अनुमानित 130 मीलियन लोग एशिया स्पेसिफिक क्षेत्र में मोटापे से ग्रसित थे जिन्हें जीवनशैली में परिवर्तन न करने एवं जीवनशैली में व्यायाम का समावेश न करने व अधिक भोजन की चाह ने उन्हें मोटा बना दिया था।

अधिकांश भारतीय लोग स्वादिष्ट विविध भोजन को अधिक पसंद करते है चाहे उसके निर्माण का तरीका कैसा भी क्यों न हो।

ये भोजन हमारे मेटाबालिज्म को प्रभावित करते है जो अनेकों क्राॅनिक रोगों को जन्म देते है।


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