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बडे शहर और अंधविश्वास




जयपुर सीटी पैलेस से कुछ दूर सामने हमने फुटपाथ के किनारे बैठा एक आदमी नजर आया, उसके पास एक काले रंग का मरियल सा घोडा बंधा हुआ था | वह अपने पास एक काली रंग की सी तख्ती लिये बैठा था और तख्ती पर लिखा थाः काले घोडे की नाल यहां मिलती है | बहुत से लोग होगें जो ये सुन चुके होंगे कि घर के दरवाजे की चौखट पर यदि काले घोडे की नाल लगवा दो तो बुरी नजरों से बचा जा सकता है | वह आदमी हाथोंहाथ अपने घोडे के पैर में से ठुकी हुई नाल निकाल कर अपने सम्माननिय कस्टमर्स को दे रहा था |

कस्टमर को भी शुभ फल मिलने का विश्वास और गारंटी थी, क्योकि घोडे के पैर से हाथों हाथ निकलवा कर जो लाया था | मुझे यह बडा अजीब लगा पर वहां से लोग वह खरीद रहे थे और कुछ देर बाद वह आदमी फिर से अपने घोडे को परेशान करने में लग जाता है दिन भर में वह ना जाने कितने बार अपने घोडे को कष्ट देता होगा | अब इतने बडे शहर में भी अंधविश्वाश के कारण कई लोग मुर्ख बनाये जा रहे थे | फुटपाथों से लोग जाने कैसी कैसी सस्ती दवाईयां, चुर्ण, भस्म ना जाने क्या क्या लेते हैं वह भी सिर्फ सुनी सुनाई बातों या अपने अति अंधविश्वास के कारण |


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