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तीसरी घटना


चार भाइयों ने रातों रात धन प्राप्त करने के चक्कर में तांत्रिकों के कहने पर मां की बेरहमी से हत्या कर दी. इन चारों भाइयों से किसी तांत्रिक ने यह कहा था कि उनके घर में खजाना मौजूद है … .लेकिन इसे प्राप्त करने के लिये अपनी माँ की बलि देनी होगी. आश्चर्य की बात यह है कि चारों भाई शिक्षित थे उनमें से एक MBA दूसरा इनजीनियर और बाकी दो बारहवीं कक्षा के छात्र थे . यह घटना भारतीय राजधानी दिल्ली की है।

एक आम आदमी जब ऐसी घटनाओं को सुनता और पढ़ता है तो आश्चर्य में पड़ जाता है कि क्या आज भी इस धरती पर चलने फिरने वाले ऐसे लोग हैं जो प्रगतिशील कहलाने के बावजूद पशुओं के स्तर से नीचे जीवन बिता रहे हैं….लेकिन अगर यह घटनायें ऐसे समुदाय की ओर से सामने आयें जो 33 करोड़ देवताओं के सामने सर टेकता हो, हर कंकड़ को शंकर मानता हो और योनि तक को पूजता हो, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी. क्योंकि जब एक व्यक्ति अपने वास्तविक निर्माता से बेवफाई कर सकता है और पंडितों और जोगियों को प्रभु का स्थान दे सकता है तो दैनिक जीवन में उनके आदेशों का पालन करने में क्यों कर झिझक महसूस करेगा।

यह एक कड़वी सच्चाई है कि आज तक हिन्दु समाज पर एक विशेष वर्ग ने ऐसा भय डाल रखा है कि ज्ञान और प्रगति के इस दौर में भी उनकी बातें पत्थर की लकीर मानी जाती हैं, यह जोगी और तांत्रिक जैसे चाहते हैं उनकी बुद्धि से खिलवाड़ करते हैं. और यह सब मात्र इस लिए हो रहा है कि उनका विश्वास सर्वशक्तिमान अल्लाह में नहीं है. यह सत्य है कि जब एक मनुष्य का संबंध अपने निर्माता से कट जाता है तो वह दर दर की ठोकरें खाता है, हर चीज़ से डरता है यहां तक कि अपनी छाया से भी डर खाता है , अपने ही जैसे व्यक्ति को लाभ और हानि का मालिक बना लेता है , उसके सामने सर टेकता है और अंधविश्वास के रंग में ऐसा रंग जाता है कि उसके अंदर से अच्छे और बुरे की तमीज़ मिट जाती है.


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