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21वीं शताब्दी विकास और अंधविश्वास




अभी हम 21वीं शताब्दी से गुजर रहे हैं , यह शताब्दी अविष्कारों की शताब्दी कहलाती है , बुद्धि विवेक में प्रगति की शताब्दी कहलाती है , हर मैदान में विकास ही विकास दिखाई दे रहा है , परन्तु खेद की बात यह है कि इस शताब्दी में सभ्य और विकसित कहलाने वाले कुछ लोग ऐसा ऐसा काम करने लगे हैं जिसे सुनकर पशुओं की दुनिया याद आ जाती है , दिमाग चकराने लगता है और बार बार हमारे मन में यह सवाल उठता है कि समझ बुझ रखने के बावजूद लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं….? पिछले दिनों समाचार पत्रों के माध्यम से तीन ऐसी घटनायें नज़रों से गुज़रीं जिन्हें पढ़कर आश्चर्यचकित रह गया.

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