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साधुओं की करतूत


साधुवेश में ढोंगियों, पाखंडियों व शैतानों की बड़ी तादाद मौजूद है. उन्हें इस से मतलब नहीं होता कि अंधभक्त क्या सोचेंगे, क्योंकि भक्तों की संख्या उन के लिए घटतीबढ़ती रहती है. अमेरिका की एक 25 वर्षीय युवती भ्रमण के लिए ऋषिकेश आई. वह लक्ष्मणझूला मार्ग से घूमती हुई गंगा तट पर पांडव गुफा तक पहुंच गई. एक साधुवेशधारी ने उस से बातें कीं और स्वयं को आयुर्वेद का जानकार बता कर मसाज विशेषज्ञ भी बताया. युवती बातों में आ गई तो कुपित मानसिकता वाले साधु ने उस के साथ छेड़छाड़ कर दुष्कर्म का प्रयास किया. युवती ने भाग कर खुद को बचाया. मामला पुलिस के संज्ञान में आया, लेकिन पाखंडी हाथ नहीं लगा. यह अकेला मामला नहीं है.

साधुवेश वाले शैतान देशीविदेशी महिला पर्यटकों पर छींटाकशी के साथ मौका पाने पर छेड़छाड़ कर बैठते हैं. एक विवाहित पर्यटक कहती है कि उस के बराबर से एक साधु ‘गोरेगोरे मुखड़े पर कालाकाला चश्मा’ गाना गाते हुए निकल गया, क्योंकि उस ने चश्मा लगाया हुआ था. स्थानीय लोगों की मानें तो ऐसे साधु पकड़ जाने के डर से स्थान बदल लेते हैं. वस्त्र गेरुआ पहनते हैं, लेकिन मन में पापलीला चलती रहती है.


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