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साधुवेश में अपराधी


हरिद्वार व ऋषिकेश जैसी धर्मनगरियों में रहने वाले साधुवेशधारियों का कोई पुलिस रिकौर्ड नहीं होता. वे कहां से आते हैं, कहां जाते हैं या उन का पूर्व का जीवन क्या है, इस बात को कोई नहीं जानता. गेरुआ वस्त्र पहनने, दाढ़ी व बालों को बढ़ा कर तरहतरह की मालाएं डाल कर तिलक लगा लेने भर से ही एक सामान्य व्यक्ति साधु हो जाता है. ज्ञान की डिगरी भी वस्त्रों के सामने अपाहिज रहती है. घालमेल ऐसा कि पता ही नहीं चलता कि कौन ठग है, कौन अपराधी और कौन साधु?

नशे का गोरखधंधा करने वाले एक तस्कर मुकेश मोहन ने गोआ पुलिस के छक्के छुड़ा दिए. दरअसल, वर्ष 2009 में वह पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था. इस के बाद उस ने ऋषिकेश व हरिद्वार का रुख किया और मुक्कू बाबा बन गया. उस ने अपनी फितरत नहीं बदली और आश्रमों में साधुओं व विदेशी पर्यटकों को चरस सप्लाई करने लगा. विदेशियों के संपर्क में आ कर उस ने इंटरनैट इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया और खुद विदेश जाने के सपने देखने लगा. 3 साल बाद वह पुलिस के हत्थे चढ़ा तो उस के पास से धार्मिक पुस्तकें, चाकू, मालाएं व कैमरा आदि चीजें बरामद हुईं.

जयपुर के किशनगढ़ के विधायक नाथूराम के बेटे की हत्या का आरोपी बलवाराम भी हरिद्वार आ कर साधु बन गया.

दरअसल, हत्या के बाद वह फरार हुआ और हरिद्वार व ऋषिकेश में साधु बन गया. पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी रख दिया. खोजबीन के बाद पुलिस ने उसे पकड़ लिया. वह नाम बदल कर बलवाराम से बलदेवदास हो गया था. उस के खिलाफ लूट के पुराने कई मामले दर्ज थे.


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