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पाखंडियों की दिनचर्या


ढोंगीपाखंडियों की दिनचर्या अलग होती है. दिन निकलते ही वे अपने जरूरी उठाऊ सामान जैसे थैला, बरतन, चिमटा, कमंडल व कपड़ों के साथ आश्रमों, मठों व घाटों पर जा कर बैठ जाते हैं. यहां श्रद्धालु व पर्यटक उन्हें सुबह नाश्ते के लिए कुछ खाने के लिए दे देते हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो अपने पैसे से दुकानों पर चाय आदि का सेवन करते हैं.

दोपहर में कई आश्रमों में आने वाले चढ़ावे व अमीर धर्मप्रेमी अनुयायियों के पैसे से भंडारे आदि होते हैं. ठलुओं के लिए भोजन की व्यवस्था आराम से हो जाती है. इस के लिए उन्हें कोई शुल्क अदा नहीं करना होता. जिन धर्मप्रेमियों के दान से यह होता है वे साधुवेशधारियों को खाते देख कर प्रसन्न होते हैं.

भोजन के बाद ऐसे लोग हरेभरे पेड़ों के नीचे नशा व आराम करते हैं. कुछ ऐसे हैं जो देशीविदेशी पर्यटकों से मांगने के लिए सड़कोंगलियों में टहलते रहते हैं. विदेशी उन्हें कैमरों में कैद कर के अपने देश के लिए भारत का नया आईना तैयार करते हैं.

इन ढोंगी साधुओं के शाम के भोजन की व्यवस्था ऐसे ही होती है. यानी कुछ इस तरह जैसे सुबह से शाम, जिंदगी तमाम.


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