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मुसलिम समाज में खतना


भले ही कुछ मुसलिम बुद्धिजीवी इस से इनकार करें, लेकिन यह सच है कि आज भी मुसलिम देशों के पिछड़े और ग्रामीण इलाकों में बालिकाओं का खतना किया जाता है और यह सब इसलाम के नाम पर होता है, कहीं दबे रूप में तो कहीं खुलेआम.

मुसलिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि तकरीबन 1450 साल पहले कुछ मुसलिम देशों के कबीलों में ही लड़कियों का खतना होता था लेकिन धीरेधीरे इस पर अंकुश लगता गया.

नाम न छापने की शर्त पर दिल्ली में अपना क्लिनिक चलाने वाले एक डाक्टर का कहना है कि केवल पुरुषों का खतना होता है, औरतों का नहीं. इस के पीछे तर्क यह है कि इस से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.

धर्म को आधार बना कर मुल्ला- मौलवियों ने जिस तरह मुसलिम महिलाओं का शोषण किया है वह किसी से छिपा नहीं है. कट्टरपंथियों की दकियानूसी सोच के कारण ही मुसलिम समाज में आज भी महिलाओं की दशा बेहद खराब है.


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