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अध्यात्म और अंधविश्वास




अध्यात्म अंधविश्वास ही है कहने वालों के तर्क दिमाग से परे है , अव्वल तो उन्हें इन दोनों के अर्थ ही नहीं पता। अध्यात्म का मतलब वे खुद गलत लगाते हैं और होता यह है कि इससे जिन्हें कुछ भी नहीं पता वे गलत दिशा में मुड़ जाते हैं। ज्ञान और जानकारी का तात्पर्य किसी को गुमराह करना नहीं है बल्कि सही और उचित जानकारी देना है। किन्तु इन दिनों हो यह रहा है कि हम सब आधी अधूरी जानकारियों को भी तोड़ मरोड़ कर अपनी पूर्वाग्रह युक्त सोच के जरिये अज्ञान ही नहीं बल्कि भयावह स्थिति का निर्माण करते जा रहे हैं। गलत बाबा लोग पैदा हो गए, स्वामी या साधू सन्यासी जन्म ले लिए गए और उनकी भक्ति प्रारम्भ हो गयी। पढ़े -लिखे या जानकार या फिर वे जो रिसर्च में लीन हैं उन्हें हमने बेवकूफ कहना शुरू कर दिया तो इसी वजह से कि इन स्वामियों, इन बाबाओं , इन तथाकथित गुरुओं ने हमें बड़े ही नाटकीय ढंग से भटका दिया है। विशवास ही नहीं होता कि कोइ इनके अलावा सही समझा या कह सकता है। हम कुतर्क से और इन तथाकथित बुद्दिजीवियों के बहलावे से इतने अंधे बन जाते हैं कि सिर्फ इनकी ही बातें हमारे गले उतरती है। यह हालत अंधविश्वास है। और यह सोच अध्यात्म है।

बहरहाल , अब कुछ महत्वपूर्ण सामग्री इस बारे में। अध्यात्म का अर्थ क्या है ? पहले इसे जान लेना आवश्यक है क्योंकि इस शब्द को लेकर भ्रांतियां फैलाई जा रही है कि यह किसी विशेष मजहब से ताल्लुक रखता है। अध्‍यात्‍म शब्‍द आत्‍म में अधि‍ उपसर्ग लगा कर बना है। आत्‍मा को ऊपर उठाना या आत्‍मोन्‍न‍ति‍ ही इसका अर्थ है। आपको शायद पता नहीं होगा कि लोगों ने इसे आत्मा से जोड़ दिया यानी आत्मा-परात्मा वाली बात। नहीं। आत्म यानी आप खुद, आपका अपना पन। नितांत अपनापन। और उसकी उन्नति। यानि आपकी अपनी उन्नति। फिर वो किसी भी दिशा की हो सकती है । अब उन्हें भूल जाइये जो इसे ईश्वर और आदि -अंत से जोड़कर कहते हैं या इसे अंधविश्वास जैसी चीजों से जोड़ते हैं। आत्म अध्ययन। आत्म का अध्याय। यह बहुत साधारण अर्थ हैं। ताकि सामान्य जन समझें और स्वीकार करें इस सत्य को, न कि फिजूल के चक्कर में पड़कर खुद गलत ज्ञान ,जानकारी प्राप्त करें फिर उस पर अपनी जमीन तैयार कर जीवन ही कलुषित कर डालें। देखिये इसमें आस्तिक और नास्तिक जैसा कोइ भाव नहीं है। आपको अगर कोइ इस रूप में इनके अर्थ समझाने की कोशिश करता हो तो तत्काल विमुख हो जाएँ उससे। वो आपको भटकायेगा। बहुत छोटी छोटी चीजें है समझने के लिए। छोटी छोटी चीजें ही बड़ी होकर सम्पूर्णता प्रकट करती है। सब कोइ आनंद के लिए विचरण कर रहे हैं। आनंद क्या है ? अध्यात्म से ही खोजा जा सकता है। आप यह स्वीकार कर सकते हैं कि हर मनुष्य के मन में दो तरह की बातें उभरती ही है , एक अच्छी या एक बुरी। यानी वह जानता है कि क्या बेहतर है और क्या गलत हो सकती है। इसका चिंतन ही अध्यात्म है।


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