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अंधविश्वास की जड़




अंधविश्वास की असली जड़ मरे हुओं की या दूसरी आत्माओं का डर है। कुछ घटनाओं का यह मतलब निकाला जाता है कि ये आत्माएँ जीवित लोगों पर मुसीबत लाने, उन्हें चिताने या फिर उन्हें आशीष देने की कोशिश कर रही हैं।

बीमारियों और उनके इलाज का अंधविश्वास के साथ भी गहरा नाता है। गरीब देशों के ज़्यादातर लोगों के लिए आधुनिक दवाइयाँ और इलाज बहुत महँगे और मिलने में मुश्किल होते हैं। इसलिए वहाँ के बहुत-से लोग, अपने बाप-दादाओं के ज़माने से चले आ रहे रस्मो-रिवाज़, जादू-टोना और अंधविश्वासों में अपनी बीमारियों का इलाज ढूँढ़ते हैं या उनको रोकने की कोशिश करते हैं। वे किसी पेशेवर डॉक्टर से ज़्यादा एक ओझे के पास जाना पसंद करते हैं क्योंकि वह ओझा उनकी भाषा जानता है और उनके रस्मो-रिवाज़ से वाकिफ होता है। ऐसी ही कुछ बातों की वजह से अंधविश्वास और भी अच्छी तरह फलते-फूलते हैं।

अंधविश्वास से जुड़ी परंपराओं के मुताबिक बीमारी और दुर्घटनाएँ महज़ एक इत्तफाक नहीं होतीं मगर इनके पीछे आत्मिक लोक में मौजूद शक्तियों का हाथ होता है। तांत्रिक शायद कहें कि कोई मरा हुआ पूर्वज किसी बात से नाराज़ है। या ओझे यही कहेंगे कि किसी ने कोई और तांत्रिक की मदद से उस पीड़ित व्यक्ति पर टोना टोटका करवा दिया है, इसलिए यह बीमारी या दुर्घटना हुई है।

पूरी दुनिया में कई अलग-अलग किस्म के अंधविश्वासों को माना जाता है। और इनके फैलने के पीछे लोक-कथाओं, पौराणिक कथाओं या स्थानीय हालातों का हाथ है। लेकिन इन सभी अंधविश्वासों के पीछे बस एक ही वजह है और वह है आत्मिक लोक की किसी आत्मा या चीज़ को खुश करना ज़रूरी है।


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